हर साल की तरह, लोग दिवाली की तारीख को लेकर असमंजस में हैं। कुछ कैलेंडर 21 अक्टूबर, 2025 बता रहे हैं, तो कुछ 20 अक्टूबर। इससे यह सवाल उठता है कि कौन सी तारीख सही है। इस गलतफहमी को दूर करने के लिए हमने देश के चार प्रमुख ज्योतिषियों और टीकाकारों के विचारों को संकलित किया है।
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🌟 दिवाली 2025: तारीख इतनी अस्पष्ट क्यों है?
इस साल अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:23 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे समाप्त होगी। कुछ विद्वानों का मानना है कि 20 अक्टूबर को देवी लक्ष्मी की पूजा करना अधिक शुभ होगा, वहीं कई लोग 21 अक्टूबर को दिवाली मनाने की बात कर रहे हैं।
🕯️ लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को शाम 6:01 से 8:17 बजे तक (स्थानीय समय), कार्यालय में प्रदोष काल शाम 5:47 से 8:29 बजे तक रहेगा और अमावस्या तिथि दोपहर 3:23 से 5:17 बजे तक रहेगी।
लक्ष्मी पूजा दीपावली की रात को की जाती है, जब देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। यह पूजा धन, समृद्धि और शुभता का प्रतीक मानी जाती है। स्वच्छ घर, दीपों की रोशनी और श्रद्धा से किया गया पूजन देवी लक्ष्मी को आकर्षित करता है। व्यापारियों के लिए यह नया वित्तीय वर्ष शुरू करने का दिन होता है, और परिवारों के लिए सुख-शांति का आह्वान।
🔮 चार प्रमुख पंडितों के विचार
1. वाराणसी की मुक्ति पंडित महासभा
15 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, इस प्रतिष्ठित समूह ने स्पष्ट किया कि दिवाली और पयश्राद्ध 20 अक्टूबर, 2025 को मनाया जाएगा। उनका दावा है कि अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:23 बजे शुरू होगी, जो बाइबिल के अनुसार पूजा के लिए उपयुक्त है। रात में, अमावस्या का पूरा प्रभाव महसूस होगा।
2. कांची के पंडित रमेश त्रिपाठी
पंडित रमेश के अनुसार, “दिवाली अमावस्या की रात को मनाई जाती है।” यह दिन उपयुक्त है क्योंकि अमावस्या 20 अक्टूबर की शाम को होगी। 21 अक्टूबर की शाम तक अमावस्या बीत चुकी होगी, जिससे अनुष्ठान का प्रभाव कम हो जाएगा।
3. उज्जैन पंचांग समिति के पंडित सुरेश मिश्रा
मिश्रा का दावा है कि 21 अक्टूबर को रात्रि में पूजा करना शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं होगा क्योंकि अमावस्या दोपहर में समाप्त हो जाती है। लक्ष्मी पूजा केवल 20 अक्टूबर को ही की जानी चाहिए। उज्जैन पंचांग भी इसी तिथि को मान्य करता है।
4. दिल्ली की पंडितिनी रेखा शर्मा
इसके अलावा, रेखा जी का सुझाव है कि 20 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाए। वह बताती हैं कि 20 तारीख को दिवाली मनाना आदर्श होगा क्योंकि यही एकमात्र दिन है जब शुभ मुहूर्त और तिथि एक साथ होती है। 21 अक्टूबर को अमावस्या नहीं होगी, जिससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
Idea: Aaj Tak
पूजा विधि का संक्षिप्त विवरण
घर की सफाई और सजावट करें; लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ स्थापित करें; मुख्य द्वार को रंगोली और दीपों से सजाएँ; उन्हें पंचामृत से स्नान कराएँ; दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें; लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें; परिवार के साथ आरती करें और प्रसाद बाँटें
🎉 सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
दिवाली एक धार्मिक अवकाश होने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी उत्सव है। अंधकार को दूर करने का संदेश फैलाने के लिए, लोग इस दिन दीप जलाते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। व्यापारिक समुदाय के लिए, यह नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का दिन है।
इस वर्ष दिवाली सोमवार को पड़ने से सप्ताह की शुरुआत शुभ होगी। इस अवकाश से कार्यस्थलों और स्कूलों को भी लाभ होगा, जिससे कर्मचारी उत्सव के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिता पाएँगे।
📌 अंतिम विचार: 20 अक्टूबर को दिवाली मनाएँ
पंचांग गणना और चारों विद्वानों के निर्णय के अनुसार, सोमवार, 20 अक्टूबर, 2025 को दिवाली मनाना उचित और शुभ है। इस दिन दीप जलाकर और खुशी से पटाखे फोड़कर लक्ष्मी पूजा करें। 21 अक्टूबर को अन्नकूट उत्सव और गोवर्धन पूजा होगी।
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